भोपाल। नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय का घेराव करने जा रहे थे, तभी पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर वाटर केनन का इस्तेमाल किया।
नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई तथा न्यायालय से मिली राहत के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए भोपाल में प्रदर्शन का ऐलान किया था। तय कार्यक्रम के अनुसार जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर 3 बजे भाजपा कार्यालय की ओर कूच कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग कर कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने वाटर केनन चलाकर भीड़ को तितर-बितर किया और जीतू पटवारी सहित कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया।
इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से कांग्रेस नेतृत्व को मिली कानूनी राहत के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। जीतू पटवारी ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी के मनगढ़ंत आरोपों को अदालत द्वारा खारिज किया जाना सत्ता के दुरुपयोग पर करारा तमाचा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के तानाशाही रवैये के खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर उतरकर संघर्ष करती रहेगी।
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड मामला साल 2012 से चर्चा में है। इस मामले की शुरुआत तब हुई जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाए।
आरोप लगाया गया कि कांग्रेस से जुड़ी कंपनी यंग इंडियन, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की हिस्सेदारी बताई जाती है, ने AJL के करीब 90 करोड़ रुपये के कर्ज को मात्र 50 लाख रुपये में अपने नाम कर लिया। इसके जरिए दिल्ली, लखनऊ, भोपाल और अन्य शहरों में स्थित AJL की करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर कथित रूप से नियंत्रण हासिल किया गया।
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितता बताते हुए अदालत में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
ED का आरोप रहा कि इस लेन-देन के जरिए नियमों का उल्लंघन कर संपत्तियों का गलत तरीके से हस्तांतरण किया गया, जबकि कांग्रेस और गांधी परिवार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस का कहना है कि यंग इंडियन एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी है और इसमें किसी भी तरह का व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया गया।
हाल के घटनाक्रम में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से कांग्रेस नेतृत्व को राहत मिलने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा जांच को कानून के दायरे में जरूरी कदम करार दे रही है।



