उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में अब पुजारियों, पुरोहितों और उनके सहायकों सहित सभी कर्मचारियों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने मंदिर में व्यवस्था और पहचान सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है।
मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि पुजारियों, पुरोहितों और सेवकों की पहचान अलग-अलग करने के लिए यह नई व्यवस्था अनिवार्य की गई है। फिलहाल पुजारियों और पुरोहितों के लिए पारंपरिक ‘सोला’ और बनियान निर्धारित की गई है। वहीं, उनके सेवकों के लिए हल्के रंग का कुर्ता-पायजामा तय किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत, सभी को अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म पहनना और साथ ही मंदिर समिति द्वारा जारी किया गया आई-कार्ड लगाना अनिवार्य होगा।
वर्तमान में महाकाल मंदिर में 16 पुजारी, 22 पुरोहित, 45 से अधिक सेवक और मंदिर समिति के लगभग 350 कर्मचारी कार्यरत हैं। अभी तक केवल मंदिर समिति के कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य था। पुजारियों और पुरोहितों के प्रतिनिधि भी सोला पहनकर आते थे, जिससे उनकी वास्तविक पहचान करना मुश्किल होता था। जनवरी माह से यह नया ड्रेस कोड सख्ती से लागू कर दिया जाएगा।
महाकाल मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मंदिर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब पुजारी, सेवक और कर्मचारियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ आईडी कार्ड अनिवार्य होगा, ताकि अनधिकृत लोगों के प्रवेश को रोका जा सके।
प्रशासन के अनुसार, काफी समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कुछ बाहरी और अनधिकृत लोग भी पारंपरिक ‘सोला’ पहनकर मंदिर में आ जाते थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल होता था और सुरक्षा व्यवस्था में चूक की संभावना बनी रहती थी।
इस समस्या से निजात पाने के लिए ही सभी श्रेणियों के कर्मचारियों और पुजारियों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया गया है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हालांकि पहले भी ड्रेस कोड लागू किया गया था, लेकिन मॉनिटरिंग और सख्ती के अभाव में वह व्यवस्था ज्यादा दिन तक चल नहीं पाई थी। इस बार नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।



