भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
देवास। Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हो गई है। पहले दिन मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मध्य प्रदेश के देवास स्थित प्रसिद्ध माता टेकरी पर भी नवरात्रि के पहले दिन भक्तों का सैलाब देखने को मिला। यहां करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा विराजमान हैं। इन्हें क्रमशः बड़ी माता और छोटी माता के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि दोनों देवियां दिन में तीन स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देती हैं।
300 फीट ऊंची टेकरी पर विराजमान हैं बड़ी और छोटी माता
देवास की माता टेकरी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। पहाड़ी पर स्थित मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र हैं। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया गया है। पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में हुई आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
मां तुलजा भवानी को बड़ी माता और मां चामुंडा को छोटी माता कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों देवियों के स्वरूप में दिनभर में तीन बार बदलाव दिखाई देता है। इसी विशेष मान्यता के कारण माता टेकरी का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
उज्जैन के राजा भर्तृहरि ने की थी तपस्या
देवास की माता टेकरी का संबंध प्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोक मान्यताओं से भी जुड़ा है। मान्यता है कि उज्जैन के राजा भर्तृहरि ने मां चामुंडा के दरबार में तपस्या की थी। वहीं, सम्राट पृथ्वीराज चौहान के सेनापति चंदबरदाई के जीवन के अंतिम वर्ष भी इसी क्षेत्र में बीतने की बात कही जाती है।
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती के रक्त की बूंदें इस स्थान पर गिरी थीं। इसी वजह से इस स्थल को विशेष शक्तिस्थल के रूप में श्रद्धा के साथ देखा जाता है। हालांकि, ये विवरण धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं पर आधारित हैं।
नवरात्रि में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं दरबार
शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान माता टेकरी पर दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्त सीढ़ियों के रास्ते जय माता दी के जयकारे लगाते हुए बड़ी माता और छोटी माता के दरबार तक पहुंचते हैं। मनोकामना पूरी होने पर कई श्रद्धालु माता को हलवा-पूरी का भोग अर्पित करते हैं।
परंपरा के अनुसार, पिछले करीब 300 वर्षों से नाथ संप्रदाय के पुजारी दोनों देवियों की पूजा-अर्चना और श्रृंगार करते आ रहे हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने की व्यवस्था
नवरात्रि में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने माता टेकरी पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। बड़ी माता और छोटी माता के मंदिरों में दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि भक्तों को दर्शन के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन माता टेकरी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और मंदिरों की आकर्षक सजावट ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी, जिसका समापन 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के साथ होगा।



