भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर बेहद चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। गृह विभाग द्वारा सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले छह वर्षों में प्रदेशभर से लगभग 2.70 लाख महिलाएं और लड़कियां लापता दर्ज की गईं। इनमें से करीब 50 हजार का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।
सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, हर वर्ष बड़ी संख्या में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी के मामले दर्ज हो रहे हैं। हालांकि पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में मामलों में ट्रेसिंग और बरामदगी का दावा किया गया है, लेकिन अब भी हजारों परिवार अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
विपक्ष ने इन आंकड़ों को लेकर सरकार पर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर गुमशुदगी कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगाती है। वहीं सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि अधिकांश मामलों में तलाश कर लिया गया है और शेष मामलों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुमशुदगी के मामलों में मानव तस्करी, बाल विवाह, पारिवारिक विवाद और सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव जैसे कई कारण सामने आते हैं। ऐसे में रोकथाम, जागरूकता और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
यही नहीं, साल 2020 से लेकर साल 2026 तक के आंकड़े साफ़ बता रहे हैं कि हर साल यह मामले बढ़ते गए हैं
– 2020 में 31,405 महिलायें और लड़कियां लापता
– 2020 में 31,405 महिलायें और लड़कियां लापता
– 2021 में 39,564 लापता
– 2022 में 43,148 लापता
– 2023 में 46,291 लापता
– 2024 में 50,798 लापता
– 2025 में 54,897 लापता
– 2026 में 28 जनवरी तक 4,197 महिलायें और लड़कियां लापता हुई
इनमें से 2,20,130 महिलायें और लड़कियां बरामद हो चुकी है लेकिन चिंता की बात यह है कि अभी भी 50,170 महिलायें और लड़कियां अभी भी लापता ही हैं.



