टाइगर सर्वे का पहला चरण शुरू: मध्य प्रदेश के 9 टाइगर रिज़र्व के 15,436 वर्ग किमी क्षेत्र में लगाए जा रहे कैमरे
मध्य प्रदेश में बाघों की गणना के लिए दुनिया के सबसे बड़े सर्वे की प्रक्रिया तेज हो गई है। सर्वे के पहले स्लॉट में प्रदेश के नौ टाइगर रिज़र्व के कुल 15,436.084 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। इस विशाल क्षेत्र में लगभग 6,500 से अधिक कैमरों का उपयोग किया जाएगा।
बाघों की निगरानी और गणना के इस अभियान में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व एक महत्वपूर्ण केंद्र है। बांधवगढ़ के कोर क्षेत्र 716.903 वर्ग किलोमीटर में तीन चरणों में कुल 800 कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि बाघों की उपस्थिति, मूवमेंट और संख्या का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।
टाइगर रिज़र्व के बाद यह अभियान सामान्य वन मंडलों के जंगलों में भी शुरू किया जाएगा, जहाँ कैमरों की तैनाती से बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर विस्तृत डेटा प्राप्त होगा। वन विभाग के अधिकारी इस सर्वे को सफल बनाने के लिए पिछले कई हफ्तों से तैयारी में जुटे हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में कैमरों का उपयोग भारत की टाइगर कंज़र्वेशन क्षमता को नई दिशा देगा और भविष्य की संरक्षण योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मध्य प्रदेश में शुरू हुआ दुनिया का सबसे बड़ा बाघ सर्वे, 30 हजार से अधिक वनकर्मी जुटे
देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय बाघ गणना के लिए मध्य प्रदेश में 15 नवंबर से कैमरा ट्रैप लगाने का काम शुरू हो गया है। यह अभियान दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वे माना जाता है।
लगभग चार महीने तक चलने वाले इस व्यापक सर्वे में प्रदेश के 9,000 वन बीटों में 30 हजार से अधिक वनकर्मी और अधिकारी जुटेंगे। सर्वे के दौरान 31,098 वर्ग किमी आरक्षित वन, 61,886 वर्ग किमी संरक्षित वन और 1,705 वर्ग किमी अवर्गीकृत वन में बाघों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी।
इससे पहले वर्ष 2022 में हुई राष्ट्रव्यापी गणना में देश में कुल 3,682 बाघ, जबकि मध्य प्रदेश में 785 बाघ पाए गए थे। नई गणना से प्रदेश और देश में बाघों की वास्तविक संख्या का अद्यतन अनुमान मिलेगा, जिससे संरक्षण रणनीतियों को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघ गणना का पहला चरण शुरू, 6,500 से अधिक कैमरों की लगाई जा रही तैनाती
अखिल भारतीय बाघ गणना के तहत मध्य प्रदेश में कैमरा ट्रैपिंग का पहला स्लॉट शुरू हो गया है। इस चरण में प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व के कुल 15,436.084 वर्ग किमी क्षेत्र में कैमरे लगाए जा रहे हैं। पूरे चरण में लगभग 6,500 से अधिक कैमरों का उपयोग किया जाएगा।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 716.903 वर्ग किमी कोर क्षेत्र में कैमरा ट्रैपिंग तीन चरणों में होगी, जिसमें कुल 800 कैमरे लगाए जाएंगे। वहीं संजय–दुबरी टाइगर रिजर्व में 562 कैमरों से बाघों की गणना की जाएगी। टाइगर रिजर्व में कैमरों की स्थापना कार्य पूरा होने के बाद यह प्रक्रिया सामान्य वन मंडल और वन विकास निगम के जंगलों में भी संचालित होगी।
स्वदेशी बैटरी का उपयोग, एक महीने से भी अधिक क्षमता
इस बार कैमरों में स्वदेशी जीटी अल्ट्रा (गोडरेज) कंपनी की उच्च क्षमता वाली बैटरी लगाई जा रही हैं। इन बैटरियों की क्षमता एक महीने से अधिक है, जबकि एक स्थान पर कैमरे 25 दिनों के लिए लगाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी पर पूरा भरोसा किया जा सकता है, लेकिन कैमरा ट्रैपिंग के दौरान कैमरों की निरंतर निगरानी भी की जाएगी।
कैमरा लगाने की नई पद्धति
इस सर्वे में कैमरा लगाने की तकनीक में भी बदलाव किया गया है।
अब 2 स्क्वायर किमी क्षेत्र की एक ग्रिड में एक सेट (दो कैमरे) लगाए जाएंगे।
पहले 4 स्क्वायर किमी में दो कैमरे लगाए जाते थे।
कैमरे एक-दूसरे के आमने-सामने लगाए जाएंगे, ताकि बाघ के दोनों तरफ की स्पष्ट तस्वीर मिल सके।
25 दिन बाद सभी कैमरों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा।
- कैमरा लगाने के काम लगभग एक सप्ताह चलेगा और जिस दिन काम पूरा होगा, उस दिन से ट्रैपिंग शुरू मानी जाएगी। कैमरे में कैप्चर होने वाले बाघों के चित्रों का विश्लेषण डब्ल्यूआईआई देहरादून में होगा। इसमें एक साल से ज्यादा का समय लगेगा और गणना के परिणाम वर्ष 2027 में 29 जुलाई को घोषित किए जाएंगे।

1 दिसंबर से शुरू होगा चिह्न संग्रहण अभियान, एम-STRIPES ऐप में दर्ज किए जाएंगे वन्य प्राणियों के संकेत
अखिल भारतीय बाघ गणना के तहत मध्य प्रदेश में कैमरा ट्रैपिंग का काम शुरू होने के बाद 1 दिसंबर से चिह्न संग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। इस चरण में वन कर्मचारी अपनी-अपनी बीट की ट्रांजिट लाइन पर चलकर वन्य प्राणियों के उपस्थित होने के संकेत एकत्र करेंगे।
चिह्न संग्रहण में वन्य प्राणियों के पगमार्क, विष्ठा, वृक्षों पर खरोंच, तथा प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाले प्राणियों की जानकारी शामिल होगी। सभी संकेत एम-STRIPES ऐप में दर्ज किए जाएंगे, जो सर्वे की सटीकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रदेश के जंगलों का वर्गीकरण — जहां होगी बाघ गणना
वन्य जीव अभ्यारण्य: 26
टाइगर रिजर्व: 9
आरक्षित वन: 31,098 वर्ग किमी
संरक्षित वन: 61,886 वर्ग किमी
अवर्गीकृत वन: 1,705 वर्ग किमी
वन वृत्त: 16
वन मंडल: 63
उप वनमंडल: 135
परिक्षेत्र: 473
उप वन परिक्षेत्र: 1,871
मध्य प्रदेश में बढ़ सकती है बाघों की संख्या
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार विस्तृत कैमरा ट्रैपिंग, आधुनिक तकनीक, एम-STRIPES आधारित डेटा संग्रहण और बड़े पैमाने पर मैदान में सक्रिय वनकर्मियों की वजह से बाघों की वास्तविक संख्या का अधिक सटीक अनुमान मिलेगा। लगातार बढ़ते संरक्षण प्रयासों को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश में इस बार बाघों की संख्या बढ़ी हुई मिल सकती है।
यह अभियान न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि प्रदेश के जैव-विविधता संरक्षण के प्रति गंभीर प्रयासों को भी दर्शाता है।