सिवनी: मध्यप्रदेश के Pench Tiger Reserve की वरिष्ठ बाघिन पी.एन. 20 (टी-20) का शुक्रवार को प्राकृतिक कारणों से निधन हो गया। लगभग 17 वर्ष की यह बाघिन कर्माझिरी रेंज के बाइसन बीट अंतर्गत जोड़ा मुनारा कैंप के पास मृत अवस्था में पाई गई। वर्ष 2008 में जन्मी यह बाघिन पर्यटकों के बीच “लंगड़ी बाघिन” के नाम से प्रसिद्ध थी।
कॉलरवाली बाघिन की बहन थी
पी.एन. 20, पेंच की विश्वविख्यात Collarwali Tigress की बहन थी। सामने के पंजे में जन्मजात विकृति होने के कारण वह हल्का लंगड़ाकर चलती थी, जिसके चलते उसे “लंगड़ी बाघिन” कहा जाता था। कर्माझिरी परिक्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत इलाके में उसका विचरण रहा और वह लंबे समय तक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।
10 शावकों को दिया जन्म
इस बाघिन का प्रजनन इतिहास भी उल्लेखनीय रहा।
दिसंबर 2012 में पहली बार दो मादा शावकों को जन्म दिया।
2016 में तीन शावक (एक नर, दो मादा)।
2019 में चार नर शावक।
2021 में एक मादा शावक, जो वर्तमान में पी.एन. 165 (लक्ष्मी) के नाम से कर्माझिरी क्षेत्र में विचरण कर रही है।
इस तरह पी.एन. 20 ने अपने जीवनकाल में कुल 10 शावकों को जन्म दिया, जिन्होंने पेंच और आसपास के जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वृद्धावस्था के कारण हुई मौत
वन विभाग के अनुसार बाघिन काफी समय से अत्यधिक वृद्धावस्था के कारण कमजोर हो चुकी थी और स्वयं शिकार करने में असमर्थ थी। इसके बावजूद उसने लंबे समय तक जीवित रहकर संघर्षशील जीवन का उदाहरण पेश किया।
सम्मानपूर्वक दी गई अंतिम विदाई
बाघिन के निधन पर वन विभाग और National Tiger Conservation Authority (NTCA) की गाइडलाइन के अनुसार वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वन विभाग की मौजूदगी में सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी गई।
वन अधिकारियों के अनुसार पी.एन. 20 केवल एक बाघिन नहीं थी, बल्कि पेंच टाइगर रिजर्व की जैव विविधता और बाघ संरक्षण की एक प्रेरणादायक प्रतीक रही है।



