भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त चाल के चलते बारिश का संकट गहराने लगा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 17 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पिछले 13 दिनों से व्यापक बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा पिछड़ गया है। अब तक प्रदेश में 268.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस समय तक 323.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी।
बारिश की कमी का असर खेती पर भी दिखाई देने लगा है। प्रदेशभर में किसानों ने खरीफ फसलों की बुवाई पूरी कर ली है, लेकिन लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी कम हो रही है और सिंचाई की आवश्यकता बढ़ने लगी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने मंगलवार को मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम और सागर समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
39 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के 39 जिलों में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। देवास में सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जबकि अलीराजपुर में सबसे कम, करीब 74 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
जुलाई के आखिरी सप्ताह में राहत की उम्मीद
मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई के अंतिम सप्ताह में एक मजबूत मानसूनी तंत्र सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है और अब तक की वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है।
हालांकि जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से स्थिति बेहतर होती नजर आ रही थी, लेकिन पिछले करीब दो सप्ताह से तेज बारिश का दौर थम गया है। अधिकांश जिलों में केवल हल्की बूंदाबांदी हो रही है, जिससे किसान और आमजन दोनों अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।



