भोपाल। वंदे मातरम की अनिवार्यता को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्र के लिए ‘मंत्र’ बताया है और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। वहीं कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए बीजेपी के नेताओं पर आजादी की लड़ाई में योगदान को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य न करने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जिन्ना के सामने घुटने टेके और मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम से दूरी बना ली। शर्मा ने कहा कि आजादी के समय वंदे मातरम गाया तो गया, लेकिन उसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी गई और इसके कई अंश काट दिए गए।
उन्होंने कहा, “जिस दिन वंदे मातरम के जयघोष के साथ देश को आजादी मिली, उसी दिन इसे अनिवार्य कर देना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया। वंदे मातरम को आधा-अधूरा कर उसकी अनिवार्यता पूरी तरह खत्म कर दी गई।”
वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग नहीं लिया, वे आज वंदे मातरम का महत्व समझाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विवाद खड़े कर रही है।
एमपी विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वंदे मातरम देश के लिए एक मंत्र है और इसे बहुत पहले ही अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धीरे-धीरे सभी व्यवस्थाओं में सुधार कर रहे हैं और तेजी से बदलाव लाने का काम कर रहे हैं।
वहीं कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम हमेशा से कार्यक्रमों में गाया जाता रहा है और यह आजादी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग नहीं लिया, वे आज इसके महत्व पर भाषण दे रहे हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि मदरसों के नाम पर राजनीति की जा रही है और वहां भी वंदे मातरम गाया जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर दिखावे की राजनीति करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वंदे मातरम के सम्मान को लेकर कभी आपत्ति नहीं रही, लेकिन इसके कुछ शब्दों को लेकर पहले से आपत्ति जताई जाती रही है। उन्होंने कहा, “हमने खड़े होने से कभी मना नहीं किया। सम्मान देने में कोई एतराज नहीं है, लेकिन गाने को लेकर निर्णय हमारा होगा। हम गाएं या न गाएं, यह हमारा अधिकार है।” उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रगीत के कुछ अंशों पर पहले भी चर्चा रही है और नए निर्देशों का अध्ययन करने के बाद ही पार्टी निर्णय लेगी।
केंद्र सरकार के नए निर्देश
केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम अनिवार्य होगा। राष्ट्रपति और राज्यपाल से जुड़े कार्यक्रमों में इसे लागू किया जाएगा। तिरंगा फहराने के अवसर पर भी इसे अनिवार्य किया गया है। छह अंतरों वाला पूरा संस्करण गाया जाएगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है। जन गण मन से पहले वंदे मातरम बजाया जाएगा और इसके दौरान सम्मान में खड़ा होना आवश्यक होगा।
वंदे मातरम की अनिवार्यता को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और यह मुद्दा आने वाले समय में और गर्मा सकता है।



