भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
मुंबई: महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित आश्रमशालाओं में पढ़ने वाले आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में राज्य की आश्रमशालाओं में 584 विद्यार्थियों की मौत हुई है। इनमें 384 मौतें सरकारी आश्रमशालाओं और 200 मौतें अनुदानित आश्रमशालाओं में दर्ज की गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल मौतों में करीब 88 प्रतिशत विद्यार्थियों की मौत घर पर, जबकि 11 प्रतिशत मौतें स्कूल परिसर में हुईं। सबसे चिंताजनक आंकड़ा यह है कि 55 विद्यार्थियों की मौत फांसी लगाने से हुई। वहीं 28 विद्यार्थियों की जान सर्पदंश से चली गई।
गंभीर बीमारी से 273 विद्यार्थियों की मौत
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गंभीर बीमारी या इलाज से जुड़ी परिस्थितियों के कारण 273 विद्यार्थियों की मौत हुई। इनमें 182 विद्यार्थी सरकारी और 91 विद्यार्थी अनुदानित आश्रमशालाओं से थे।
इसके अलावा विभिन्न दुर्घटनाओं में 228 विद्यार्थियों की मौत हुई। इनमें सरकारी आश्रमशालाओं के 155 और अनुदानित आश्रमशालाओं के 73 विद्यार्थी शामिल हैं।
मौतों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
| मौत का कारण | सरकारी आश्रमशाला | अनुदानित आश्रमशाला | कुल |
|---|---|---|---|
| गंभीर बीमारी | 182 | 91 | 273 |
| दुर्घटना | 155 | 73 | 228 |
| फांसी | 25 | 30 | 55 |
| सर्पदंश | 22 | 6 | 28 |
| कुल | 384 | 200 | 584 |
गडचिरोली में तीन छात्राओं की मौत के बाद हुई समीक्षा
दरअसल, हाल ही में गडचिरोली जिले के जपतलाई स्थित एक आश्रमशाला में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत के बाद आदिवासी विकास विभाग ने राज्यभर की आश्रमशालाओं में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की थी। इसी समीक्षा के दौरान पिछले दो वर्षों में हुई विद्यार्थियों की मौत का यह आंकड़ा सामने आया।
रिपोर्ट में सरकारी आश्रमशालाओं में मौतों की संख्या अनुदानित आश्रमशालाओं के मुकाबले अधिक बताई गई है। इससे आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।
4,300 करोड़ से ज्यादा का सालाना बजट
राज्य में 500 सरकारी आश्रमशालाओं में करीब 2.04 लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन पर सरकार हर साल लगभग 2,303 करोड़ रुपये खर्च करती है। वहीं 556 अनुदानित आश्रमशालाओं में करीब 2.61 लाख विद्यार्थी नामांकित हैं और इनके लिए सालाना लगभग 2,025 करोड़ रुपये का बजट बताया गया है।
यानी आश्रमशालाओं पर हर साल 4,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद विद्यार्थियों की मौत के ये आंकड़े व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आश्रमशालाओं में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।




