भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि पेंशन जैसे अधिकार में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पेंशन प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब रोकने के साथ अब प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। वित्त विभाग ने राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) के तहत ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए हर स्तर पर अधिकतम समय-सीमा निर्धारित कर दी है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य पेंशन प्रक्रिया को केवल ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि उसे समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। निर्धारित समय-सीमा में प्रकरणों का निराकरण अनिवार्य रूप से करना होगा। तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित स्तर की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
सेवानिवृत्ति का इंतजार नहीं, पहले ही तैयार होगा पेंशन प्रकरण
आगामी महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के अग्रिम पेंशन प्रकरणों में स्वीकृति की कार्रवाई वित्त विभाग के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार समय-सीमा में पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य यह है कि कर्मचारी के सेवानिवृत्त होते ही उसकी पेंशन शुरू करने में अनावश्यक देरी न हो।
सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण के लिए तीनों स्तरों पर कुल 15 कार्य दिवस की अधिकतम समय-सीमा तय की गई है। क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर को अपने-अपने स्तर पर निर्धारित अवधि में कार्रवाई पूरी करनी होगी।
क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के लिए 5-5 दिन
नई व्यवस्था के तहत नवीन पेंशन प्रकरण को क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के तीनों स्तरों से गुजरना होगा। प्रत्येक स्तर पर अधिकतम 5-5 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं।
वहीं, पुनरीक्षित पेंशन और वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के लिए प्रक्रिया को और तेज किया गया है। पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण में क्रियेटर को अधिकतम 4 कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को 3-3 कार्य दिवस में कार्रवाई पूरी करनी होगी।
इस तरह पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण के निराकरण के लिए कुल 10 कार्य दिवस की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की गई है।
वेतन निर्धारण के लिए 11 दिन की डेडलाइन
वेतन निर्धारण के प्रकरणों में भी समय-सीमा तय कर दी गई है। क्रियेटर को अधिकतम 5 कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को 3-3 कार्य दिवस में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।




