भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता, प्रासंगिकता और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन का आकलन करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो लाड़ली बहना योजना सहित विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं की गहन समीक्षा करेगी। समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक महीने के भीतर शासन को सौंपनी होगी।
5 विभागों के वरिष्ठ अधिकारी समिति में शामिल
सरकार द्वारा गठित इस हाई लेवल कमेटी में पांच प्रमुख विभागों के अपर मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति योजनाओं के क्रियान्वयन, खर्च, पात्र हितग्राहियों तक पहुंच और वास्तविक लाभ की स्थिति की समीक्षा करेगी।
समिति में वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित संबंधित योजनाओं से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
इन प्रमुख योजनाओं पर रहेगा फोकस
समिति की समीक्षा के दायरे में राज्य और केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं शामिल की गई हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है या नहीं।
महिला एवं बाल विकास
- लाड़ली बहना योजना
- लाड़ली लक्ष्मी योजना
- सक्षम आंगनवाड़ी योजना
कृषि एवं किसान कल्याण
- मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- किसान सहायता योजनाएं
- सिंचाई के लिए दी जाने वाली बिजली सब्सिडी
सामाजिक सुरक्षा
- मुख्यमंत्री संबल योजना
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं
आवास, पेयजल और ऊर्जा
- प्रधानमंत्री आवास योजना
- जल जीवन मिशन
- अटल गृह ज्योति योजना
स्वास्थ्य एवं शिक्षा
- आयुष्मान भारत योजना
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
- समग्र शिक्षा अभियान
- विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं
सरकारी खर्च और हितग्राहियों को मिलने वाले लाभ की होगी जांच
उच्चस्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खजाने से खर्च की जा रही राशि का सही और प्रभावी उपयोग हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी तरह की खामी, दोहराव या अनावश्यक खर्च की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।
समिति यह भी देखेगी कि योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम छोर पर खड़े पात्र व्यक्ति तक समय पर और सुगमता से पहुंच रहा है या नहीं। एक महीने के भीतर समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार योजनाओं में आवश्यक बदलाव और सुधार को लेकर आगे का निर्णय ले सकती है।




