हमारी धरती-हमारा राज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव – जनजातीय गौरव दिवस / मोरतलाई दौरा
सांस्कृतिक संदेश:
“हमारी धरती और संस्कृति ही हमारी पहचान”
“जनजातियां हमारी मुकुट मणियां हैं, हर प्रदेशवासी के लिए गौरव की बात”
विकास परियोजनाएं:
पानसेमल और वरला में उद्वहन सिंचाई परियोजना मंजूर → सभी 51 गांवों को पानी उपलब्ध
पानसेमल: रेस्ट हाउस और हाई सेकेंडरी स्कूल, एसडीओपी कार्यालय खुलेगा
मोरतलाई: मिडिल स्कूल प्रोन्नत → हाईस्कूल में हायर सेकेंडरी कक्षाएं
मोरतलाई: आदमकद प्रतिमा – धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का लोकार्पण
133 करोड़ रूपए लागत के 11 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन
मुख्यमंत्री की उपस्थिति:
डॉ. यादव मोरतलाई में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव – जनजातीय गौरव दिवस, मोरतलाई, बड़वानी
सांस्कृतिक संदेश:
मध्यप्रदेश = ट्राइबल स्टेट, जनजातियों का घर
“जनजातियां हमारी मुकुट मणियां हैं” → गौरव और सम्मान की बात
“अबुआ दिशुम-अबुआ राज” → हमारी धरती, हमारा राज
धरती और संस्कृति = हमारी पहचान
जनजातीय गौरव दिवस = नई पीढ़ी को वीर जननायकों के बलिदान, शौर्य और साहस से परिचित कराना
मुख्य विकास कार्य एवं घोषणाएँ:
मोरतलाई: धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण
कुल 11 विकास कार्य: 6 लोकार्पण + 5 भूमिपूजन; लागत: 133 करोड़ रुपये
राजपुर-दवाना मार्ग (46 करोड़) → लोकार्पण
सेंधवा शासकीय महाविद्यालय भवन, बलवाड़ी → भूमिपूजन (14.86 करोड़)
पानसेमल और बारला: उद्वहन सिंचाई परियोजना विस्तार → 51 गांवों को पानी
पानसेमल: रेस्ट हाउस, एसडीओपी ऑफिस खोलना
टेमला: हायर सेकेंडरी स्कूल खोलना
मोरतलाई: मिडिल स्कूल → हायर सेकेंडरी स्कूल प्रोन्नत
रायचूर: हाई स्कूल → हायर सेकेंडरी स्कूल प्रोन्नत
रामगढ़-सापखड़की: पक्की रोड निर्माण
मुख्यमंत्री का संदेश:
विकास में सबका साथ जरूरी
सहयोग से प्रदेश को विकास की ऊंचाइयों तक ले जाना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव – जनजातीय गौरव दिवस, मोरतलाई, बड़वानी
मुख्यमंत्री का संदेश:
जनजातीय गौरव:
जनजातीय भाई-बहनों ने माटी और संस्कृति के लिए बलिदान दिया।
राजा भभूत सिंह से लेकर रानी अवंतिबाई तक जनजातीय नायकों का योगदान।
वीरों की भूमि बड़वानी, यहां के वीरों ने अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब दिया।
“अबुआ दिशुम-अबुआ राज” → हमारी धरती, हमारा राज।
जनजातीय गौरव दिवस:
यह दिवस वीर जननायकों के बलिदान और शौर्य से नई पीढ़ी को परिचित कराता है।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती भव्य रूप से मनाई जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय नायकों को सम्मान देने की शुरुआत की।
जनजातीय नायकों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया, अंग्रेजों से कहा – “यह धरती हमारी है।”
विकास कार्यों की घोषणाएं:
किसान welfare:
राज्य सरकार सोयाबीन की खरीद 5328 रुपये प्रति क्विंटल कर रही है।
लाड़ली बहनों को 45 हजार करोड़ रुपये की राशि दी गई।
किसानों को 12 हजार रुपये सम्मान निधि भेजी गई।
गोपालन और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना: डेयरी व्यवसाय के लिए 10 लाख रुपये तक अनुदान।
जनजातीय समुदाय के लिए योजनाएं:
PESA कानून → जनजातीय समाज को सशक्त बनाना।
वन अधिकार अधिनियम → 3 लाख परिवारों को सशक्त किया।
तेंदूपत्ता संग्रहण राशि बढ़ाकर 4 हजार रुपये प्रति मानक बोरा की गई।
मिलेट केपिटल:
प्रदेश को मिलेट केपिटल बनाने का सपना किसान भाईयों की मेहनत से पूरा होगा।
जनजातीय वर्ग के लिए शिक्षा और रोजगार योजनाएं।
स्मारकों और संग्रहालयों की घोषणा:
राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह संग्रहालय:
जबलपुर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निर्माण।
जनजातीय नायकों की जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण:
विकसित मध्यप्रदेश:
2047 के “विकसित और आत्मनिर्भर भारत” के लिए “विकसित मध्यप्रदेश” का सपना।
जनजातीय समाज की समान भागीदारी के बिना प्रदेश की प्रगति अधूरी है।
मुख्यमंत्री की संवाद और घोषणा:
जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा:
10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा।
विकास प्रदर्शनी के दौरान जनजातीय बहनों के साथ सेल्फी ली।
प्रबुद्धजन से संवाद और क्षेत्रीय विकास पर चर्चा।
अन्य प्रमुख वक्तव्य:
सांसद श्री गजेंद्र सिंह पटेल:
पीएम मोदी ने 15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” घोषित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पानसेमल और बारला सिंचाई परियोजना के विस्तार को स्वीकृति दी।
राज्यसभा सदस्य डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी:
जनजातीय समाज का योगदान भारतीय सभ्यता में अमूल्य है।
पानसेमल विधायक श्री श्याम सिंह बर्डे:
सिकल सेल एनीमिया के इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना की मांग की।
कार्यक्रम में उपस्थित लोग:
मंत्री श्री गौतम टेटवाल, एनएसटीसी अध्यक्ष श्री अंतरसिंह आर्य, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री बलवंत पटेल, पूर्व मंत्री श्री प्रेमसिंह पटेल, अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं जनजातीयजन उपस्थित थे।




