जिले के ग्राम हापला में शनिवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहाँ 38 वर्षीय किसान अखिलेश सोलंकी ने खेत की मेढ़ पर लगे पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे गांव में शोक फैल गया है, जबकि परिजन बदहवास हालत में हैं।
स्वजन का आरोप है कि बढ़ते कर्ज़ के दबाव ने अखिलेश को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
हालाँकि, एडीएम केआर बडोले ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बताया कि मामला कर्ज़ से ज्यादा पारिवारिक विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि किसान पर कर्ज़ तो था, लेकिन उसे लेकर किसी द्वारा परेशान करने या कोई नोटिस देने जैसी बात सामने नहीं आई है।
प्रशासन अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहा है।
न्यूज़ रिपोर्ट — खंडवा किसान आत्महत्या मामला
कर्ज़ और लगातार खराब होती फसलों ने एक और किसान की जिंदगी छीन ली।
परिजन बताते हैं कि अखिलेश सोलंकी पिछले कई वर्षों से आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। सोसायटी और बैंक का लगभग तीन लाख रुपये का कर्ज, साथ ही साहूकारों से लिया गया उधार—इन सबका दबाव उन पर बढ़ता जा रहा था।
फसलें बार-बार खराब होने, मौसम की मार और बाजार में मक्का व अरवी के लगातार गिरते दामों ने स्थिति को और बदतर बना दिया। आर्थिक तंगी ने अखिलेश को मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
इसी तनाव के बीच शनिवार सुबह उन्होंने खेत की मेढ़ पर लगे पेड़ से फंदा लगाकर जान दे दी।
परिवार का कहना है कि यदि समय पर मदद और उचित दाम मिलते, तो यह त्रासदी टल सकती थी। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
परिजन का कहना है कि मृतक किसान अखिलेश सोलंकी पिछले लंबे समय से गहरे तनाव में था। परिवार के पास कुल आठ एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें दोनों भाइयों को चार–चार एकड़ जमीन मिली हुई है। लेकिन लगातार खराब होती फसल ने अखिलेश की कमर तोड़ दी।
पिछले दो–तीन साल से सोयाबीन की फसल लगातार चौपट हो रही थी, जिससे न सिर्फ आय पर असर पड़ा बल्कि बढ़ते कर्ज़ का दबाव भी सिर चढ़कर बोलने लगा। समय पर कर्ज़ न चुका पाने की चिंता में अखिलेश अक्सर तनावग्रस्त रहता था।
परिजन का कहना है कि फसल नुकसान, गिरते भाव और बढ़ते कर्ज़ ने मानसिक रूप से उन्हें इतना कमजोर कर दिया कि आखिरकार उन्होंने जान देने जैसा कदम उठाया।
खंडवा जिले के ग्राम हापला में किसान अखिलेश सोलंकी की आत्महत्या के मामले में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में करीब तीन लाख रुपये के कर्ज़ की पुष्टि हुई है, लेकिन किसी बैंक, संस्था या साहूकार द्वारा नोटिस या वसूली दबाव डाले जाने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
जांच टीम का कहना है कि पारिवारिक तनाव भी घटना के प्रमुख कारणों में से एक हो सकता है। पुलिस विभिन्न बिंदुओं पर मामले की विस्तृत जांच कर रही है। फिलहाल मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
ग्राम पंचायत हापला के सरपंच ने बताया कि गांव में कई किसान फसल नुकसान और बाजार में गिरते दामों से जूझ रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
ADएम केआर बडोले ने कहा:
“प्रारंभिक जांच में मामला पारिवारिक विवाद का सामने आया है। किसान पर कर्ज था, लेकिन इसके कारण किसी द्वारा परेशान करने या कोई नोटिस देने जैसी बात सामने नहीं आई है।”



