भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
इंदौर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार, 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। वे इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होकर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। राहुल गांधी के दौरे को लेकर मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। वहीं, कार्यक्रम से पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मध्य प्रदेश पुलिस और सरकार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।
दोपहर 2:30 बजे इंदौर पहुंचेंगे राहुल गांधी
जारी कार्यक्रम के अनुसार, राहुल गांधी शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से वे रेडिसन होटल के लिए रवाना होंगे, जहां स्वागत कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद शाम तक वे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। कार्यक्रम स्थल पर राहुल गांधी की पीछे के गेट से सीधी एंट्री होगी।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत भीड़ को करीब 2 हजार की क्षमता वाले सेक्टरों में बांटने और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम में कलाकार भी देंगे प्रस्तुति
राहुल गांधी के कार्यक्रम में कई सिंगर और कलाकारों की प्रस्तुतियां भी प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम को लेकर आयोजन स्थल पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राहुल गांधी इससे पहले देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं।
पवन खेड़ा ने MP पुलिस पर साधा निशाना
कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मध्य प्रदेश पुलिस और सरकार पर निशाना साधा है।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर पहले उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का हवाला दिया गया और अब कोचिंग सेंटर संचालकों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, संचालकों से कार्यक्रम में शामिल होने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने संबंधी लिखित आश्वासन मांगा जा रहा है।
पवन खेड़ा ने इसे सुरक्षा व्यवस्था के बजाय डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लोगों को सुरक्षा देने के बजाय डराने का काम किया जा रहा है।




