इंदौर। मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित इंदौर-खंडवा रेल लाइन परियोजना के लिए चोरल के घने जंगलों से बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की तैयारी शुरू हो गई है। परियोजना के मार्ग में आने वाले करीब 2.5 लाख पेड़ों की कटाई अक्टूबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। हालांकि, पर्यावरण और वन संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पेड़ों की कटाई एक साथ नहीं की जाएगी। इसे अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
कटाई और लकड़ी के परिवहन का मास्टर प्लान तैयार
वन विभाग और रेलवे ने पेड़ों की कटाई के साथ लकड़ी के सुरक्षित परिवहन के लिए विस्तृत योजना तैयार की है। रेलवे द्वारा चिन्हित किए गए हिस्सों के आधार पर अलग-अलग चरणों में पेड़ों की कटाई की जाएगी, ताकि जंगल का पूरा क्षेत्र एक साथ प्रभावित न हो।
कटाई के बाद लकड़ी को जंगल से बाहर निकालने के लिए 25 विशेष ट्रकों को लगाया जाएगा। ये ट्रक कई चरणों में लकड़ी को संबंधित डिपो तक पहुंचाएंगे। बड़ी मात्रा में एकत्र होने वाली लकड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जंगल के बाहर बड़े स्थान का चयन किया जा रहा है।
कीमती लकड़ियों की सुरक्षा और अवैध कटाई को रोकने के लिए 25 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। वहीं, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत बारिश के करीब चार महीनों के दौरान पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक रहेगी।
कटने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए लगेंगे 5 लाख पौधे
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रेलवे ने परियोजना के लिए वन भूमि और पेड़ों की क्षतिपूर्ति के मद में करीब 10 करोड़ रुपये की राशि वन विभाग को उपलब्ध कराई है। इस राशि से पेड़ों की कटाई के बाद बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना में जितने पेड़ काटे जाएंगे, उसके मुकाबले करीब दोगुने यानी 5 लाख पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग इन पौधों की अगले पांच वर्षों तक देखभाल और संवर्धन करेगा। उद्देश्य नए पौधों को विकसित कर वन क्षेत्र की पर्यावरणीय क्षति की भरपाई करना है।
तीन साल में चरणबद्ध तरीके से होगी कटाई
रेलवे लाइन के निर्माण के लिए चोरल के जंगलों में पेड़ों की कटाई तीन साल तक अलग-अलग चरणों में की जाएगी। बारिश के मौसम में कटाई पर रोक और कटाई के बाद बड़े पैमाने पर पौधरोपण की योजना के जरिए वन विभाग पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने का प्रयास करेगा।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर से खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है, लेकिन चोरल के घने जंगलों में होने वाली पेड़ों की कटाई पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एक बड़ा विषय बनी हुई है।




