धार। Archaeological Survey of India (ASI) ने भोजशाला विवाद को लेकर बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के अनुपालन में ASI ने भोजशाला को उसकी मूल ऐतिहासिक पहचान देते हुए अब इसे “राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला एवं संस्कृत पाठशाला” के रूप में संबोधित किया है। नई विज्ञप्ति में पहले प्रयुक्त “कमाल मौला मस्जिद” संबंधी उल्लेख हटा दिया गया है।
सालभर होगी पूजा-अर्चना
ASI के नए आदेश के अनुसार अब हिंदू समाज को भोजशाला परिसर में वर्ष के सभी 365 दिनों तक निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना करने की अनुमति रहेगी। इससे पहले यहां पूजा केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के अवसर पर सीमित थी।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
धार स्थित भोजशाला को परमार वंश के राजा भोज की ज्ञान परंपरा और माँ सरस्वती के विद्या केंद्र के रूप में माना जाता है। हिंदू पक्ष लंबे समय से इसे माँ सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताता रहा है। वहीं यह स्थल वर्षों से विवाद का केंद्र भी बना हुआ था।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली व्यवस्था
माननीय उच्च न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप और हिंदू पूजा परंपरा को महत्व देते हुए ASI को आवश्यक निर्देश दिए थे। अदालत के आदेश के बाद ASI ने तत्काल नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर दी।
ASI के पास रहेगा संरक्षण
भोजशाला परिसर का संरक्षण और रखरखाव पहले की तरह ASI के अधीन ही रहेगा। इस फैसले को भोजशाला की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। धार सहित पूरे मध्य प्रदेश में यह निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है।





