Adhik Maas यानी मलमास की शुरुआत 17 मई से हो गई है, जो 15 जून तक रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह विशेष महीना हर तीन साल में एक बार आता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अधिकमास में ग्रह-नक्षत्र मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माने जाते, इसलिए इस अवधि में शुभ संस्कार टाल दिए जाते हैं।
पुरुषोत्तम मास के रूप में भी जाना जाता है अधिकमास
अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में पूजा-पाठ, जप-तप, दान-पुण्य और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व रहता है। मान्यता है कि इस समय किए गए आध्यात्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।
मांगलिक कार्यों पर क्यों लगती है रोक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में ग्रहों की स्थिति विवाह और अन्य शुभ संस्कारों के लिए अनुकूल नहीं रहती। इसी कारण पंडित और ज्योतिषाचार्य इस दौरान बड़े मांगलिक कार्य करने से मना करते हैं। माना जाता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
विष्णु पूजा और कथा का विशेष महत्व
अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु इस दौरान भगवान सत्यनारायण की कथा, व्रत और लक्ष्मी पूजन करते हैं। मान्यता है कि इससे धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
जप-तप और धार्मिक पाठ से मिलता है लाभ
इस महीने में श्रीमद्भागवत गीता, विष्णु सहस्त्रनाम और रामायण का पाठ करना शुभ माना गया है। वहीं महामृत्युंजय मंत्र का जाप ग्रह दोषों को दूर करने वाला माना जाता है। रोजाना शालीग्राम भगवान के सामने घी का दीपक जलाने से अखंड सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
दान-पुण्य से मिलता है कई गुना फल
मलमास में दान का विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल और धन का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। गर्मी के मौसम में छाता दान करने की परंपरा भी शुभ मानी जाती है।
ये कार्य माने जाते हैं शुभ
हालांकि मांगलिक कार्य इस दौरान नहीं किए जाते, लेकिन पूजा, यज्ञ, अनुष्ठान, सत्संग, मंत्र जाप और भगवान शिव का अभिषेक अत्यंत शुभ माना जाता है। पवित्र नदियों में स्नान और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से आत्मिक शुद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।



