भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
अजयगढ़ (पन्ना)। केन-बेतवा लिंक और मझगाय बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में चल रहा ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को उस वक्त एक बेहद गंभीर और दर्दनाक मोड़ पर आ गया, जब प्रतीकात्मक चिताओं के बीच एक वास्तविक चिता जल उठी। बनहरीकला टपरिया की रहने वाली 78 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी महिला रमिया बाई की बुधवार तड़के मौत हो गई। इस घटना के बाद से विस्थापितों के आंदोलन स्थल पर मातम पसरा हुआ है, वहीं प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच दावों को लेकर टकराव की स्थिति बन गई है।
आंदोलनकारियों का आरोप: बेघर होने के सदमे और तनाव ने ली जान
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने एक वीडियो जारी कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि:
- करीब चार महीने पहले रमिया बाई का घर बिना पूर्ण मुआवजा दिए तोड़ दिया गया था, जिससे वह गहरे सदमे में थीं।
- लगातार बढ़ते पानी के कारण बेघर होने के डर से वह भारी मानसिक तनाव से गुजर रही थीं, जिसके चलते पिछले कुछ दिनों से उनका खाना-पीना भी छूट गया था।
- आंदोलनकारियों ने इसे प्रशासनिक दमन और पुनर्वास प्रक्रियाओं में हुए भ्रष्टाचार का नतीजा बताया है।
- प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि 12.50 लाख रुपये का पुनर्वास पैकेज और मकान-जमीन का लंबित भुगतान न मिलने के कारण कई परिवारों की जिंदगी संकट में है। अमित भटनागर ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावित क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं बहाल करने की मांग की है।
प्रशासनिक पक्ष: आरोपों को नकारा, कहा— हो चुका है पूरा भुगतान
दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को ने सचिव और जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के हवाले से बताया कि:
- बुजुर्ग महिला रमिया बाई की मौत मंगलवार रात अचानक पेट दर्द होने के कारण हुई है।
- प्रशासन के दावों के मुताबिक, मृतिका को उनकी अधिग्रहित भूमि के लिए ₹28.70 लाख, मकान के लिए ₹15.23 लाख और पुनर्वास राशि के रूप में ₹5 लाख का पूरा भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
थमता नहीं दिख रहा विस्थापितों का आक्रोश
भले ही प्रशासन मुआवजे के पूरे भुगतान का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीन पर स्थिति तनावपूर्ण है। इस घटना ने एक तरफ जहां शासन के राहत दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ जलमग्न होते गांवों और न्याय की आस में बैठे विस्थापितों के आक्रोश को और भड़का दिया है। बुजुर्ग महिला की मौत के बाद डूब क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपने हक की लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया है।



