सारंडा के जंगलों में 47 घंटे तक चला बारूद का खेल, 4.49 करोड़ के 13 नक्सली ढेर; ऑपरेशन मेगाबुरु से टूटा नक्सली नेटवर्क
झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थित एशिया के सबसे घने सारंडा जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले के कुमडीह और बहादा जंगल क्षेत्र में चलाए गए ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ ने नक्सली नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। इस कार्रवाई में अब तक 13 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिन पर कुल 4.49 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
47 घंटों तक चली इस जबरदस्त गोलीबारी से पूरा इलाका दहल उठा। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को ढेर करने के साथ-साथ भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है। फिलहाल जंगल के भीतर सर्च ऑपरेशन जारी है, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि कुछ हार्डकोर नक्सली अब भी घने जंगलों में छिपे हो सकते हैं।
35 लाख का इनामी जोनल कमांडर रापा मुंडा ढेर
इस बड़ी कार्रवाई में 35 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर रापा मुंडा मारा गया है। रापा मुंडा अप्रैल 2025 में हुए उस भीषण आईईडी ब्लास्ट का मुख्य आरोपी था, जिसमें झारखंड जगुआर का एक जवान शहीद हुआ था। इसके अलावा, दो लाख की इनामी महिला नक्सली मुवति होनहांगा को भी सुरक्षाबलों ने मार गिराया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह ऑपरेशन रणनीतिक रूप से नक्सलियों के लिए बड़ा झटका है।
गांवों में दहशत, इलाका सील
मुठभेड़ स्थल के आसपास स्थित गांवों में दहशत का माहौल है। लगातार फायरिंग के कारण करीब 20 परिवार अपने घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं ताकि किसी भी नक्सली को भागने का मौका न मिले।
शव निकालने में लगी भारी फोर्स
सारंडा के दुर्गम और बीहड़ जंगलों में ऑपरेशन इतना भीषण था कि शवों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन को छह ट्रैक्टर और आठ से अधिक मजिस्ट्रेटों (बीडीओ/सीओ) की तैनाती करनी पड़ी। मुठभेड़ स्थल पर लगातार फायरिंग के कारण रेस्क्यू टीम को कई बार पीछे हटना पड़ा। भारी सुरक्षा और नाकेबंदी के बीच आखिरकार शवों को जंगल से बाहर निकाला गया। इस दौरान कुमडीह और सेडल नाका पर ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रही।
बड़े नक्सलियों की तलाश जारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ के वक्त जंगल में 20 से अधिक नक्सलियों का दस्ता मौजूद था। आशंका है कि एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा और केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल भी इसी इलाके में मौजूद थे। हालांकि कुछ बड़े नक्सली फरार होने में सफल रहे, लेकिन सुरक्षाबलों का पूरा फोकस अब इन ‘करोड़िया’ इनामी हार्डकोर नक्सलियों की तलाश पर है।



