नई दिल्ली। होलाष्टक की शुरुआत आज 24 फरवरी, मंगलवार से हो गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के ये आठ दिन शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं। यह अवधि होलिका दहन तक रहती है, जिसके बाद रंगों का पर्व होली मनाई जाती है।
क्यों माने जाते हैं ये 8 दिन अशुभ?
होलाष्टक से जुड़ी दो प्रमुख पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
पहली कथा के अनुसार प्राचीन काल में भगवान शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया था। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया और आठ दिनों तक ग्रह उग्र स्थिति में रहे। तभी से इन दिनों को अशुभ माना जाने लगा।
दूसरी कथा भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका से जुड़ी है। मान्यता है कि इन दिनों में प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दी गईं। अंत में होलिका दहन हुआ और अधर्म पर धर्म की विजय हुई।
होलाष्टक के दौरान क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन आठ दिनों में—
विवाह, सगाई, नामकरण, मुंडन सहित 16 संस्कार न करें।
नया वाहन, मकान, प्रॉपर्टी या व्यवसाय शुरू करने से बचें।
गृह निर्माण और गृह प्रवेश टालें।
संभव हो तो नौकरी परिवर्तन से परहेज करें।
हवन, यज्ञ जैसे मांगलिक कार्य भी वर्जित माने गए हैं।
इन दिनों क्या करें?
होलाष्टक के दौरान जप, तप और ध्यान करना श्रेष्ठ माना गया है।
भगवान विष्णु की आराधना कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
भगवान शिव की पूजा कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।
ग्रह शांति के लिए ज्योतिषीय परामर्श लेकर उपाय किए जा सकते हैं।
धार्मिक दृष्टि से यह समय आत्मचिंतन और भक्ति के लिए उपयुक्त माना गया है। होलिका दहन के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत की जाती है।



