जयपुर। राजस्थान की शाही विरासत और लग्जरी पर्यटन का प्रतीक मानी जाने वाली ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ इस बार 43 साल पुरानी परंपरा तोड़ने जा रही है। आमतौर पर सितंबर से अप्रैल के बीच संचालित होने वाली यह लग्जरी ट्रेन पहली बार मई महीने में भी चलेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग और विशेष चार्टर बुकिंग के चलते यह फैसला लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेन में यात्रियों की संख्या में करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साल 1982 में राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) और भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई ‘पैलेस ऑन व्हील्स’ को चलता-फिरता शाही महल कहा जाता है। ट्रेन का इंटीरियर राजपूत दरबारों की भव्यता को दर्शाता है। रेशमी सजावट, शाही डिजाइन और निजी ‘खिदमतगार’ सेवा यात्रियों को रॉयल अनुभव कराती है।
यह ट्रेन 7 रात और 8 दिन के सफर पर नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होती है। यात्रा के दौरान जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा जैसे ऐतिहासिक शहरों की सैर कराई जाती है। यात्रियों को महलों की विजिट, टाइगर सफारी, रेगिस्तान में डिनर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ताजमहल के सूर्योदय का अनुभव भी मिलता है।
मई में ट्रेन संचालन को लेकर चर्चा इसलिए भी है क्योंकि राजस्थान में यह महीना सबसे गर्म माना जाता है। अब बदलते ट्रैवल ट्रेंड्स, बेहतर सुविधाओं और यात्रियों की बढ़ती रुचि को देखते हुए संचालन अवधि बढ़ाने का फैसला किया गया है। विशेषज्ञ इसे भारत में लक्जरी रेल पर्यटन के लिए नए अध्याय के रूप में देख रहे हैं।
ट्रेन में डीलक्स केबिन, सुपर डीलक्स केबिन, सुइट्स और प्रेसिडेंशियल सुइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यात्रियों को निजी सहायक, लग्जरी रेस्तरां, लाउंज बार, गाइडेड टूर और लग्जरी ट्रांसपोर्ट जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।
बुकिंग के लिए यात्री राजस्थान पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए आवेदन कर सकते हैं। किराया केबिन की श्रेणी, सीजन और यात्रियों की संख्या के अनुसार तय होता है। वहीं RTDC की रद्दीकरण नीति के अनुसार, यात्रा से 120 से 90 दिन पहले टिकट रद्द कराने पर 10 फीसदी कटौती की जाती है, जबकि 29 दिन के भीतर रद्दीकरण पर कोई रिफंड नहीं मिलता।



