भोपाल विधानसभा सत्र: छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड पर हंगामा, विपक्ष ने सरकार को बताया ‘पूतना’
मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार को हंगामेदार शुरुआत के साथ प्रारंभ हुआ। सत्र के पहले ही दिन, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने छिंदवाड़ा कफ सीरप कांड को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस विधायक हाथों में ‘पूतना’ के पुतले और बच्चों के प्रतीक लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने सरकार की तुलना पौराणिक राक्षसी ‘पूतना’ से की और आरोप लगाया कि बच्चों की मौत के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार जिम्मेदार है।
शून्य काल में जोरदार हंगामा
विधानसभा के शून्य काल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने कार्यवाही बाधित करते हुए हंगामा किया। विपक्ष ने सत्र की कम अवधि को लेकर भी सवाल उठाए, यह तर्क देते हुए कि यदि जनहित के मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं है, तो सत्र बुलाने का कोई औचित्य नहीं है।
विधायक आसंदी (अध्यक्ष के आसन) के सामने आकर नारेबाजी करने लगे। स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हस्तक्षेप किया और कहा कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज ही निर्धारित है, जिसमें सत्र की अवधि और अन्य विषयों पर चर्चा की जा सकती है। अध्यक्ष द्वारा व्यवस्था दिए जाने के बाद, कांग्रेस के सदस्य अंततः अपने स्थानों पर वापस लौटे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
मध्य प्रदेश विधानसभा का संक्षिप्त शीतकालीन सत्र, जिसमें कुल चार बैठकें होनी हैं, विधायी कार्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। पांच दिसंबर तक चलने वाले इस सत्र में राज्य सरकार कई अहम विधेयक और वित्तीय प्रस्ताव सदन पटल पर रखेगी। तीन दिसंबर को अवकाश रहेगा।
10 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट
सत्र के दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेगी। यह बजट करीब 10 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान है। यह अनुपूरक बजट मुख्य रूप से केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्यांश, जल जीवन मिशन, भावांतर योजना और अधोसंरचना विकास की चल रही योजनाओं के लिए प्रावधान करेगा। सूत्रों के अनुसार, इसमें किसी भी ऐसी नई योजना के लिए प्रावधान नहीं होगा जिससे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त भार पड़े।
‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ चुनाव प्रणाली की वापसी
सत्र के प्रमुख आकर्षणों में से एक नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों के चुनाव की प्रणाली में बदलाव का विधेयक है। राज्य सरकार नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव तीन साल बाद फिर से सीधे मतदाताओं से कराने संबंधी संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेगी।
इस नई व्यवस्था में ‘रिकॉल’ (Recall) का प्रावधान भी लागू होगा। इसका अर्थ है कि यदि अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आता है, तो राज्य निर्वाचन आयोग ‘खाली कुर्सी-भरी कुर्सी’ चुनाव प्रणाली के माध्यम से जनता से सीधे फैसला लेगा कि अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे या हट जाएंगे। 2022 में यह चुनाव पार्षदों के माध्यम से हुए थे, लेकिन अब पुरानी प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली बहाल की जा रही है।
अन्य प्रमुख विधेयक
उपरोक्त विधेयकों के अलावा, सत्र में निम्नलिखित महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे:
- दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक: इसमें दुकानदारों और कामगारों के लिए सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही, दुकान खोलने के लिए ‘गुमास्ता’ लाइसेंस की फीस को संशोधित कर पांच हजार रुपये करने का प्रस्ताव है।
- वेतन-भत्ते संशोधन विधेयक: मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और विधायकों के वेतन-भत्तों में संशोधन से संबंधित विधेयक भी सदन में रखा जाएगा।
1497 सवालों के साथ विपक्ष कानून-व्यवस्था, जल जीवन मिशन और कृषि मुद्दों पर सरकार को घेरेगा
मध्य प्रदेश विधानसभा के चार दिवसीय शीतकालीन सत्र के लिए कुल 1,497 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जो सत्र के हंगामेदार और व्यस्त रहने का संकेत देते हैं। विधायकों द्वारा भेजे गए इन प्रश्नों में तारांकित और अतारांकित प्रश्न शामिल हैं, जिनके माध्यम से सदस्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे।
सत्र के दौरान चर्चा के लिए विभिन्न माध्यमों से भी सूचनाएं मिली हैं, जिनमें छह स्थगन प्रस्ताव, 194 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 52 शून्यकाल की सूचनाएं और 14 अशासकीय संकल्प शामिल हैं।
विपक्ष की रणनीति: सरकार को घेरने की तैयारी
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह जनहित से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।
कांग्रेस के प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं:
- कानून-व्यवस्था की स्थिति: राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और अपराधों में वृद्धि का मुद्दा।
- अत्याचार के मामले: अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों पर हो रहे अत्याचार और शोषण के मामले।
- जल जीवन मिशन में गड़बड़ी: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना के क्रियान्वयन में हुई कथित अनियमितताएं और भ्रष्टाचार।
- कृषि संकट: किसानों को समय पर खाद उपलब्ध न होना और कृषि उपज का उचित मूल्य न मिलना।
- मतदाता सूची पुनरीक्षण: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में सामने आई कथित गड़बड़ियां।
इन मुद्दों को लेकर सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा होने की संभावना है।



