भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
धर्म डेस्क: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह चार महीने की पवित्र अवधि भगवान श्रीहरि विष्णु के योगनिद्रा में रहने का समय होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है, जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक चलता है। इस वर्ष चातुर्मास 25 जुलाई से 20 नवंबर तक रहेगा।
इस दौरान श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, जप, तप, उपवास, दान और ध्यान जैसे धार्मिक कार्यों में विशेष रूप से भाग लेते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयनकाल में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
साधना और आत्मसंयम का समय
चातुर्मास को केवल धार्मिक अनुष्ठानों का ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का भी काल माना जाता है। इस अवधि में कई श्रद्धालु एक समय भोजन, फलाहार या व्रत का नियम अपनाते हैं। नियमित पूजा-पाठ, घर की स्वच्छता, सकारात्मक सोच और परिवार में सौहार्द बनाए रखने से सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है।
श्रावण मास में भगवान शिव की विशेष आराधना भी की जाती है, जिससे इस अवधि का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
चातुर्मास में घर की सुख-शांति के लिए उपाय
- प्रतिदिन पानी में थोड़ा-सा नमक मिलाकर घर में छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होने की मान्यता है।
- सुबह या शाम कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता है।
- संध्या के समय मुख्य द्वार पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
- घर में नियमित रूप से गंगाजल या तुलसी युक्त जल का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है।
खान-पान में रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान प्रत्येक महीने कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करने की परंपरा है—
- श्रावण: हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।
- भाद्रपद: दही का त्याग करने का विधान बताया गया है।
- आश्विन: दूध के सेवन से परहेज करने की परंपरा है।
- कार्तिक: प्याज, लहसुन और उड़द की दाल का सेवन न करने की सलाह दी जाती है।
यात्रा में भी बरतें संयम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्षा ऋतु में जीव-जंतुओं की सक्रियता बढ़ जाती है। इसलिए चातुर्मास के दौरान अनावश्यक यात्राओं से बचने और संयमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।



