भोपाल। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस समझौते पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधे जवाब मांगा है।
दिग्विजय सिंह ने सवाल किया कि अमेरिका के कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोले जाने पर सरकार का क्या रुख है और क्या इस फैसले से देश के किसानों को नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान पहले से ही लागत, उत्पादन और बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में विदेशी कृषि उत्पादों की एंट्री किसानों की आजीविका पर असर डाल सकती है।
कांग्रेस नेता ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि ट्रेड डील के तहत किसानों के हितों की रक्षा के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए गए हैं। उनका कहना है कि बिना व्यापक चर्चा और पारदर्शिता के ऐसे समझौते किसानों के भविष्य के लिए खतरा बन सकते हैं।
वहीं, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में US-India ट्रेड डील को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस समझौते से अमेरिकी किसानों को तो लाभ मिलेगा, लेकिन भारतीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि भारतीय बाजार में सस्ते और सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी कृषि उत्पादों के आने से स्थानीय किसानों की आय पर सीधा असर पड़ेगा। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के सामने प्रतिस्पर्धा और अधिक कठिन हो जाएगी।
कांग्रेस नेता ने सरकार से यह भी सवाल किया कि जब अमेरिकी पक्ष खुले तौर पर इसे अपने किसानों के हित में बता रहा है, तो भारतीय किसानों के हितों की गारंटी कैसे दी जा रही है।
वहीं, इस मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील में भारतीय किसानों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, विशेषकर छोटे-मझोले किसान और डेयरी सेक्टर को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने संसद और मीडिया में दोहराया कि मुख्य अनाज, डेयरी उत्पाद और प्रमुख फलों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को डील से बाहर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई बाजार नहीं खोला गया है जिससे भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचे।
फिलहाल, US-India ट्रेड डील को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर किसान संगठनों तक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।



