भोपाल। बदलते समय के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब नारी शक्ति को सीधे तौर पर अपनी विचारधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। मध्य भारत से शुरू हो रही इस पहल के तहत किशोरियों, युवतियों और महिलाओं के लिए विशेष “किशोरी विकास वर्ग” की रूपरेखा तैयार की गई है।
आधी आबादी को जोड़ने की रणनीति
संघ की इस नई पहल का उद्देश्य देश की आधी आबादी को संगठन की विचारधारा से जोड़ना है। अब तक दुर्गा वाहिनी जैसे अनुषांगिक संगठनों के जरिए महिलाओं तक पहुंच बनाई जाती रही है, लेकिन पहली बार महिलाओं के लिए अलग और संरचित वर्ग शुरू करने की तैयारी है।
प्रशिक्षण और जागरूकता पर जोर
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक, “किशोरी विकास वर्ग” के माध्यम से 13 से 25 वर्ष की किशोरियों और युवतियों को आत्मरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें संघ की विचारधारा से भी परिचित कराया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, यह पहल महिलाओं की “शाखा” जैसी संरचना की दिशा में भी एक कदम मानी जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मुद्दे पर राजनीति भी गर्मा गई है। कांग्रेस नेता विक्रम चौधरी ने इस पहल को “आडंबर” बताते हुए कहा कि संघ की विचारधारा पहले से महिला विरोधी रही है और यह कदम सिर्फ दिखावा है।
वहीं बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि संघ एक सामाजिक संगठन है और नारी सशक्तिकरण के लिए उठाए जा रहे कदमों का विरोध करना गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए इस तरह की पहल जरूरी है।
नई इबारत की ओर संकेत
संघ की यह पहल न सिर्फ संगठनात्मक विस्तार का संकेत देती है, बल्कि बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका को केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। “किशोरी विकास वर्ग” के जरिए आने वाले समय में संघ की कार्यप्रणाली में एक नया अध्याय जुड़ सकता है।



