भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। प्रथम पूज्य गणपति की आराधना करने से बुद्धि, सुख और समृद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है। भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन एक ऐसी चीज है जिसे गणेश पूजा में अर्पित करना वर्जित माना जाता है—तुलसी।
आमतौर पर हिंदू पूजा-पद्धति में तुलसी का विशेष महत्व होता है, लेकिन गणेश जी की पूजा में इसे न चढ़ाने की धार्मिक मान्यता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।
गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश गंगा तट पर तपस्या कर रहे थे। उसी समय तुलसी देवी की नजर उन पर पड़ी और वह गणेश जी से विवाह करने की इच्छा प्रकट करने लगीं। उन्होंने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन गणपति ने ब्रह्मचर्य व्रत का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
कथा के अनुसार, इससे क्रोधित होकर तुलसी ने गणेश जी को विवाह का श्राप दे दिया। इसके जवाब में गणेश जी ने भी तुलसी को दैत्य से विवाह का श्राप दे दिया।
श्राप के बाद क्या हुआ?
मान्यता है कि बाद में तुलसी देवी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी। तब भगवान गणेश ने उन्हें भगवान विष्णु की प्रिय बनने का वरदान दिया। तभी से तुलसी का उपयोग विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में विशेष रूप से किया जाने लगा, जबकि गणेश पूजा में इसे वर्जित माना गया।
बुधवार की गणेश पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
- भगवान गणेश को तुलसी के पत्ते अर्पित न करें।
- पूजा में दूर्वा जरूर चढ़ाएं।
- मोदक, गुड़ और लाल फूल गणपति को प्रिय माने जाते हैं।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप शुभ माना जाता है।
तुलसी का धार्मिक महत्व
तुलसी को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों और चरणामृत में भी तुलसी का विशेष स्थान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर देवी-देवता की पूजा में कुछ विशेष नियम होते हैं, जिनका पालन श्रद्धालु परंपरा के अनुसार करते हैं।



