भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
भोपाल मध्यप्रदेश में लगातार हो रही बारिश से अब बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। पिछले तीन दिनों से जारी बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नर्मदा नदी का जलस्तर महज 48 घंटे में करीब 10 फीट बढ़ गया है। कई छोटे पुल पानी में डूब गए हैं, जबकि निचले इलाकों में घरों तक पानी पहुंचने लगा है। प्रदेश में अब तक 527 बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
बारिश से बिगड़ते हालात को देखते हुए भोपाल और गुना में बुधवार को स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया है। राजधानी भोपाल में लगातार दूसरे दिन भी कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बीते दो दिनों में शहर में करीब 8 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।
इंदौर संभाग के 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते बुधवार को भी बारिश का दौर जारी रहेगा। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है।
भारी बारिश के कारण नदी-नालों के उफान पर आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
भोपाल में 200 मकानों में घुसा पानी
राजधानी भोपाल में बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। शहर के करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। कई प्रमुख सड़कों पर घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। पानी भरने के कारण कुछ इलाकों में बिजली के ट्रांसफार्मर और वितरण पेटियां भी जलमग्न हो गईं, जिसके चलते एहतियातन बिजली आपूर्ति बंद करनी पड़ी।
मंगलवार रात राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर करीब एक फीट पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। वहीं न्यू पुलिस लाइन स्टेशन रोड पर पानी से भरे गड्ढे में बच्चों को लेकर जा रही स्कूली वैन फंस गई।
नर्मदा का जलस्तर 946.40 फीट पर पहुंचा
लगातार बारिश का असर नर्मदा नदी पर भी दिखाई दे रहा है। नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर नर्मदा का जलस्तर 946.40 फीट दर्ज किया गया है। पिछले 48 घंटे में नदी का जलस्तर करीब 10 फीट बढ़ चुका है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
पिछले 24 घंटे में राजगढ़ जिले के ब्यावरा में करीब 9 इंच बारिश हुई। खिलचीपुर में 8 इंच और जीरापुर में 7.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। राजगढ़ शहर में 4.4 इंच, जबकि नरसिंहपुर और पचोर में 3.7 इंच तथा सारंगपुर में 3.6 इंच बारिश हुई।
आगर-मालवा और शाजापुर में भी जोरदार बारिश
आगर-मालवा के सोयतकलां में 7.7 इंच, आगर में 3.6 इंच और शाजापुर के गुलाना में 3.8 इंच बारिश दर्ज की गई। गुना के कुंभराज में 3.7 इंच और शाजापुर शहर में 3.4 इंच बारिश हुई।
मौसम विभाग के अनुसार, इंदौर क्षेत्र में निम्न दबाव का क्षेत्र और मानसून की द्रोणिका सक्रिय है। इसके अलावा दक्षिणी हिस्से से भी एक द्रोणिका गुजर रही है। इन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में पिछले 72 घंटे से बारिश का दौर बना हुआ है।
अगले चार दिन मौसम के लिहाज से अहम
उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवात सक्रिय हुआ है। इसके प्रभाव से 12 अगस्त के आसपास एक और निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। ऐसे में अगले चार दिन मध्यप्रदेश के मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
45 जिलों में अब भी बारिश सामान्य से कम
प्रदेश में लगातार बारिश होने के बावजूद 45 जिलों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की कमी करीब 18 प्रतिशत तक बनी हुई है। कई जिलों में सामान्य से 4 से 52 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।
पश्चिमी मध्यप्रदेश के भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। यहां सामान्य के मुकाबले 5 से 46 प्रतिशत तक कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि भोपाल, गुना, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में बारिश सामान्य से अधिक हुई है।
जून में मध्यप्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई में मानसून ने रफ्तार पकड़ी, लेकिन दो बार ब्रेक आने के कारण जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। जुलाई का कोटा पूरा होने के बावजूद पूरे मानसून सीजन में प्रदेश अभी भी सामान्य से करीब 13 प्रतिशत पीछे है।
मध्यप्रदेश में पूरे मानसून सीजन की सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। वहीं भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 38 से 39 इंच रहती है।




