28 December History: क्यों खास है 28 दिसंबर? आज़ादी की लड़ाई से लेकर बिजनेस, सिनेमा और क्रांतियों तक का ऐतिहासिक दिन
28 दिसंबर का दिन इतिहास के पन्नों में एक असाधारण स्थान रखता है। यह तारीख राजनीति, व्यापार, विज्ञान और सिनेमा जैसी कई अहम क्षेत्रों में हुई ऐतिहासिक घटनाओं की साक्षी रही है। भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए 28 दिसंबर ने कई बड़े बदलावों की नींव रखी।
- 28 December History: क्यों खास है 28 दिसंबर? आज़ादी की लड़ाई से लेकर बिजनेस, सिनेमा और क्रांतियों तक का ऐतिहासिक दिन
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)
- पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम’ (1896)
- बिजनेस जगत के दो ‘रत्न’
- खेल और राजनीति की बड़ी घटनाएं
- विश्व इतिहास में 28 दिसंबर
- निष्कर्ष
- एक नज़र में 28 दिसंबर की मुख्य ऐतिहासिक घटनाएं
आज ही के दिन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई थी, जिसने देश की आज़ादी की संगठित लड़ाई का शंखनाद किया। ए.ओ. ह्यूम की पहल पर बनी कांग्रेस आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनी और महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इसके माध्यम से देश को आज़ादी की राह दिखाई।
28 दिसंबर भारत के औद्योगिक इतिहास के लिए भी बेहद खास है। इसी दिन देश को धीरूभाई अंबानी और रतन टाटा जैसे दो महान उद्योगपति मिले, जिन्होंने भारतीय बिजनेस को वैश्विक पहचान दिलाई। धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस के ज़रिये आम आदमी को शेयर बाजार से जोड़ा, वहीं रतन टाटा ने टाटा समूह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विश्व सिनेमा के इतिहास में भी 28 दिसंबर का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 1895 में फ्रांस के पेरिस शहर में पहली बार सार्वजनिक रूप से फिल्म का प्रदर्शन किया गया था, जिसे सिनेमा की शुरुआत माना जाता है। यही वह क्षण था, जिसने आगे चलकर फिल्म उद्योग को मनोरंजन का सबसे प्रभावशाली माध्यम बना दिया।
इन ऐतिहासिक घटनाओं के कारण 28 दिसंबर न केवल एक तारीख है, बल्कि यह क्रांति, बदलाव और प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है। राजनीति से लेकर व्यापार और सिनेमा तक, इस दिन ने दुनिया को नई दिशा देने वाले कई अध्याय लिखे हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)
आज ही के दिन 1885 में मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की नींव रखी गई थी। इस ऐतिहासिक पहले सत्र का आयोजन ए.ओ. ह्यूम ने किया था और इसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी। इस अधिवेशन में देशभर से आए 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आगे चलकर यही संगठन भारत की आज़ादी की लड़ाई का सबसे मजबूत मंच बना।
पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम’ (1896)
1896 में कोलकाता में हुए कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ का सार्वजनिक रूप से गायन किया। यह गीत आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बना।
बिजनेस जगत के दो ‘रत्न’
धीरूभाई अंबानी (1932): रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर को हुआ था। उन्होंने भारतीय उद्योग की सोच बदली और आम आदमी को शेयर बाजार से जोड़ा।
रतन टाटा (1937): टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन और महान परोपकारी रतन टाटा का भी आज जन्मदिन है। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छुआ।
खेल और राजनीति की बड़ी घटनाएं
1983: दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने मद्रास टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 30वां टेस्ट शतक जड़कर सर डॉन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ा।
2013: आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस के समर्थन से पहली बार दिल्ली में सरकार बनाई और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने।
विश्व इतिहास में 28 दिसंबर
सिनेमा का उदय (1895): फ्रांस के लूमियर भाइयों ने पेरिस के एक कैफे में पहली बार किसी फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन किया, जिसे आधुनिक सिनेमा की शुरुआत माना जाता है।
नेपच्यून की खोज (1612): महान वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने पहली बार नेपच्यून ग्रह को देखा, हालांकि तब उन्होंने इसे एक स्थिर तारा समझा।
स्टैन ली का जन्म (1922): मार्वल कॉमिक्स के दिग्गज रचनाकार स्टैन ली, जिन्होंने स्पाइडर-मैन, एक्स-मेन जैसे अमर किरदार रचे, का जन्म भी 28 दिसंबर को हुआ था।
निष्कर्ष
28 दिसंबर केवल एक तारीख नहीं, बल्कि यह क्रांति, रचनात्मकता, नेतृत्व और बदलाव का प्रतीक है। आज़ादी की लड़ाई से लेकर बिजनेस, खेल, राजनीति और सिनेमा तक—इस दिन ने इतिहास को नई दिशा दी है।
एक नज़र में 28 दिसंबर की मुख्य ऐतिहासिक घटनाएं
28 दिसंबर का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में कई अहम घटनाओं के लिए जाना जाता है। राजनीति, उद्योग, सिनेमा और राष्ट्रवाद से जुड़ी कई बड़ी घटनाएं इसी तारीख से जुड़ी हुई हैं। एक नज़र डालते हैं 28 दिसंबर की प्रमुख घटनाओं पर—
1885: मुंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई, जिसने आगे चलकर देश की आज़ादी की संगठित लड़ाई का नेतृत्व किया।
1895: फ्रांस के लूमियर ब्रदर्स ने दुनिया की पहली फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन किया, जिससे आधुनिक सिनेमा की शुरुआत मानी जाती है।
1896: कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पहली बार सार्वजनिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का गायन हुआ, जो भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक बना।
1932/1937: देश को दो महान उद्योगपति—धीरूभाई अंबानी और रतन टाटा—मिले, जिन्होंने भारतीय उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई।
1952: देश के पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली का जन्म हुआ।
1972: स्वतंत्रता सेनानी और वरिष्ठ नेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का निधन हुआ, जो भारतीय राजनीति के अहम स्तंभ रहे।
इन घटनाओं के कारण 28 दिसंबर को इतिहास में विशेष महत्व प्राप्त है, जिसने भारत और दुनिया को कई क्षेत्रों में नई दिशा दी।



