इंदौर/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साफ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी मानी जाती है, लेकिन जब उसी पानी के कारण लोगों की जान चली जाए तो पूरी व्यवस्था कटघरे में आ जाती है। यही वजह है कि यह मामला अब राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया है।
इंदौर पानी कांड को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और बसपा प्रमुख मायावती ने इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि “इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं, और ऊपर से भाजपा नेताओं के अहंकारी बयान सामने आ रहे हैं। जिन घरों में चूल्हा बुझ गया, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया। लोगों ने बार-बार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई?”
राहुल गांधी के इस बयान के बाद इंदौर दूषित पानी कांड पर सियासत और तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का मामला है, जिसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, बसपा प्रमुख मायावती ने भी केंद्र सरकार से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
राहुल गांधी ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बांटा गया और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं। समय रहते पानी सप्लाई बंद क्यों नहीं किया गया? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह “फोकट सवाल नहीं, जवाबदेही की मांग है” और कहा कि साफ पानी जीवन का अधिकार है, एहसान नहीं। BJP का लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का हमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले पीएम मोदी जी इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर मौन हैं। यह वही शहर है जिसे लगातार ‘Cleanest City’ का ख़िताब मिला, लेकिन भाजपा के निकम्मेपन के चलते लोग साफ़ पानी के मोहताज हैं। भ्रष्टाचार और धांधली योजनाओं में व्याप्त हैं। आम जनता भुगत रही है।”
मायावती ने भी उठाया मामला
बसपा प्रमुख मायावती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इंदौर में “प्रदूषित पानी पीने से अनेक निर्दोष नागरिकों की मौत और बीमार होने की खबर दुखद और चौंकाने वाली है। यह सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का उदाहरण है। राज्य और केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि देश के अन्य हिस्सों में ऐसी घटनाएं न हों।”
मामले का विवरण
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जांच में हैजा फैलाने वाला जीवाणु पाया गया। 8,571 लोगों की जांच हो चुकी है, जिसमें 338 नए संक्रमित मरीज सामने आए हैं। 200 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर है। मृतकों की संख्या को लेकर स्थानीय और सरकारी आंकड़े अलग हैं। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 4 मौतों की जानकारी दी, जबकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतों की पुष्टि की। स्थानीय लोग मौतों की संख्या 15 बता रहे हैं।
इंदौर का यह दूषित पानी कांड न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में प्रशासनिक जवाबदेही और स्वच्छता की स्थिति पर सवाल खड़ा कर चुका है।



