भोपाल संवाददाता:रोशनी बिसेन
धर्म डेस्क: भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा आज से शुरू हो गई है। सनातन धर्म के सबसे पवित्र उत्सवों में शामिल यह यात्रा 24 जुलाई तक चलेगी। हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली इस रथ यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। लगभग 3 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है।
रथ यात्रा की सबसे खास परंपरा यह है कि इस दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश श्रीमंदिर के गर्भगृह में दर्शन नहीं कर पाते, उन्हें महाप्रभु रथ यात्रा के दौरान सुलभ दर्शन देते हैं।
मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा नौ दिनों तक गुंडीचा मंदिर में विराजमान रहते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दौरान भगवान के आड़प दर्शन करने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।
रथ मार्ग ‘बड़ा डांड’ पर शंखनाद, ढोल-मंजीरों की गूंज और ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों के बीच आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिलता है। इस दिव्य उत्सव का साक्षी बनने के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।



