भारत बना ‘मोटा अनाज’ का वैश्विक केंद्र: रिकॉर्ड उत्पादन और निर्यात से दुनिया भर में बढ़ी लोकप्रियता
नई दिल्ली:
भारत का पारंपरिक मोटा अनाज (मिलेट्स) अब सिर्फ ग्रामीण भारत के खेतों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया भर के खानपान की आदतों में अपनी जगह बना चुका है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती वैश्विक जागरूकता और भारत सरकार के प्रयासों के कारण, मिलेट्स अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘सुपरफूड’ के तौर पर तेजी से उभर रहा है।
देश ने कृषि नवाचार और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका साबित करते हुए, वित्त वर्ष 2024-25 में 180.15 लाख टन मोटे अनाज का रिकॉर्ड-तोड़ उत्पादन हासिल किया है। यह आंकड़ा न केवल भारत की कृषि शक्ति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा में देश के योगदान को भी रेखांकित करता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान
घरेलू उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ, भारत ने मिलेट्स के निर्यात में भी उल्लेखनीय सफलता पाई है। हाल ही में, भारत ने 89,164 टन मिलेट्स का निर्यात किया, जिससे देश को 37 मिलियन डॉलर (लगभग 3 अरब रुपये) का राजस्व प्राप्त हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय मिलेट्स की गुणवत्ता और पोषण क्षमता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।
वैश्विक सम्मान और भारत का नेतृत्व
इस सफलता की नींव तब रखी गई जब संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भारत के प्रस्ताव पर 2023 को “अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष” (International Year of Millets) घोषित किया। यह वैश्विक मान्यता भारत द्वारा दशकों से मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने, इसके स्वास्थ्य लाभों पर शोध करने और इसे मुख्यधारा में लाने के प्रयासों का सीधा परिणाम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिलेट्स, जो कम पानी और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में भी आसानी से उगाए जा सकते हैं, जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक टिकाऊ और पौष्टिक समाधान प्रस्तुत करते हैं।
भारत, अपने रिकॉर्ड उत्पादन और मजबूत वैश्विक उपस्थिति के साथ, दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि मोटा अनाज केवल एक फसल नहीं, बल्कि पोषण, स्थिरता और आर्थिक अवसर का एक शक्तिशाली प्रतीक है।



